Sunday, September 13, 2009

KHAMOSHI

महोदय ,
हमारा धोखेबाज पड़ोसी हमेशा से हमें छलता आया है और उसकी ये हरकत बदस्तूर जारी है
आख़िर कब तक कब तक हमारे हुक्मरान और नीति- निर्माता उसकी इन नापाक हरकतों को झेलते रहेंगे।
ये जानते हुए भी की वो हमारी बराबरी मैं कहीं भी नहीं ठहराता है। लेकिन भी वो हमसे टकराने का हमेशा दुस्साहस करता है ,और एक हम है की उसे एक मीठी सी चेतावनी देकर चुप हो जाते है, तथा हम देशवाशियों को हमारे नीति-निर्माता ये कह कर झुनझुना पकड़ा देते है की ये मद्दा हम अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उठाएंगे या इसका विरोध हम कडाई से उसके समक्ष करेंगे। लेकिन महोदय आजतक इसका उस पर न तो असर हुआ है न ही मुंह तोड़ जब्बाब ही दिया गया है। आख़िर हमारे हुक्मरान इतना डरते ही क्यों है? इस सब का नतीजा ये हो रहा है की पड़ोसी की हिम्मत बढती जा रही है। वो हर बार किसी न किसी तरह हमारे मुह पर तमाचा मार रहा है। एक हम है की उसे शान्ति का पाठ पढ़ने में ही लगे है।
हमारे हुक्मरानों की खामोशी का मुझे तो एक ही राज़ समझ में आता है की उन्हें अपनी जैबे भरने और इस देश की भोली जनता को उल्लू बनने से फुर्सत मिले तो ईंट का जबाब पत्थर से देंगे । मगर अफ़सोस वो तो इस सब से पहले ही संवेदनहीन हो गए है।
ऐसे में जब की दूसरा पड़ोसी भी ऐसी हरकतों पर उतर आया है ,हमारे नेताओं की खामोशी क्या रंग लाती है देखते है । इन्तजार...............

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