हुजुर अपने प्रिय नेता राहुल गाँधी आजकल ये कैसी राजनीती कर रहे है? दलितों के घर सोना ,खाना ,खाना और उनके घर जन मेरी समझ से परे है। साहब जरा सोच कर के देखिये की राहुल गाँधी के इस तरह की हरकतों से मीडिया में ये ख़बर जिस तरह से फैलती है और अचानक से दलित सुर्खियों में आ जाता है, जनाब बकया इन हरकतों से हम लोग या कांग्रेस पार्टी के ये नेता जातिवाद को फ़िर से फैला नहीं रहे है। जरा सोच कर देखिएगा। एक और बात की राहुल अमीर और गरीब के बीच की खायी को और बढ़ा रहे है। पिछले दिनों एक समाचार पत्र में राहुल गाँधी के हवाले से लिखा था की उन्हें गरीबो के घर जन अच्छा लगता है। इसका मतलब वो गरीबी मिटाने के लिए कुछ करने वाले नहीं है। क्या इन हरकतों से राहुल जी अमीर -गरीब और दलितों के मन में बैठी कुंठा को और बढ़ा नही रहे है। राहुल को इनके घर जाने ,खाना खाने से इतर जमीनी स्तर पर कुछ प्रयास और समाज के इन पिछडे तबको के लिए कल्याणकारी योजनाये शुरू करनी चाहिए। पार्टी ने प्रयास जरुर किए है लेकिन उनका जमीनी स्तर पर क्रियान्वन सच्चाई और ईमानदारी से होना चाहिए और इन सब योजनाओ का जरूरतमंद को लाभ भी मिले।
लेकिन इस तरह के राजनीती न हो की जो चीजे हमारी तरक्की में अवरोध है उन्हें बढावा मिले.
Sunday, November 1, 2009
Sunday, September 13, 2009
KHAMOSHI
महोदय ,
हमारा धोखेबाज पड़ोसी हमेशा से हमें छलता आया है और उसकी ये हरकत बदस्तूर जारी है।
आख़िर कब तक कब तक हमारे हुक्मरान और नीति- निर्माता उसकी इन नापाक हरकतों को झेलते रहेंगे।
ये जानते हुए भी की वो हमारी बराबरी मैं कहीं भी नहीं ठहराता है। लेकिन भी वो हमसे टकराने का हमेशा दुस्साहस करता है ,और एक हम है की उसे एक मीठी सी चेतावनी देकर चुप हो जाते है, तथा हम देशवाशियों को हमारे नीति-निर्माता ये कह कर झुनझुना पकड़ा देते है की ये मद्दा हम अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उठाएंगे या इसका विरोध हम कडाई से उसके समक्ष करेंगे। लेकिन महोदय आजतक इसका उस पर न तो असर हुआ है न ही मुंह तोड़ जब्बाब ही दिया गया है। आख़िर हमारे हुक्मरान इतना डरते ही क्यों है? इस सब का नतीजा ये हो रहा है की पड़ोसी की हिम्मत बढती जा रही है। वो हर बार किसी न किसी तरह हमारे मुह पर तमाचा मार रहा है। एक हम है की उसे शान्ति का पाठ पढ़ने में ही लगे है।
हमारे हुक्मरानों की खामोशी का मुझे तो एक ही राज़ समझ में आता है की उन्हें अपनी जैबे भरने और इस देश की भोली जनता को उल्लू बनने से फुर्सत मिले तो ईंट का जबाब पत्थर से देंगे । मगर अफ़सोस वो तो इस सब से पहले ही संवेदनहीन हो गए है।
ऐसे में जब की दूसरा पड़ोसी भी ऐसी हरकतों पर उतर आया है ,हमारे नेताओं की खामोशी क्या रंग लाती है देखते है । इन्तजार...............
हमारा धोखेबाज पड़ोसी हमेशा से हमें छलता आया है और उसकी ये हरकत बदस्तूर जारी है।
आख़िर कब तक कब तक हमारे हुक्मरान और नीति- निर्माता उसकी इन नापाक हरकतों को झेलते रहेंगे।
ये जानते हुए भी की वो हमारी बराबरी मैं कहीं भी नहीं ठहराता है। लेकिन भी वो हमसे टकराने का हमेशा दुस्साहस करता है ,और एक हम है की उसे एक मीठी सी चेतावनी देकर चुप हो जाते है, तथा हम देशवाशियों को हमारे नीति-निर्माता ये कह कर झुनझुना पकड़ा देते है की ये मद्दा हम अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उठाएंगे या इसका विरोध हम कडाई से उसके समक्ष करेंगे। लेकिन महोदय आजतक इसका उस पर न तो असर हुआ है न ही मुंह तोड़ जब्बाब ही दिया गया है। आख़िर हमारे हुक्मरान इतना डरते ही क्यों है? इस सब का नतीजा ये हो रहा है की पड़ोसी की हिम्मत बढती जा रही है। वो हर बार किसी न किसी तरह हमारे मुह पर तमाचा मार रहा है। एक हम है की उसे शान्ति का पाठ पढ़ने में ही लगे है।
हमारे हुक्मरानों की खामोशी का मुझे तो एक ही राज़ समझ में आता है की उन्हें अपनी जैबे भरने और इस देश की भोली जनता को उल्लू बनने से फुर्सत मिले तो ईंट का जबाब पत्थर से देंगे । मगर अफ़सोस वो तो इस सब से पहले ही संवेदनहीन हो गए है।
ऐसे में जब की दूसरा पड़ोसी भी ऐसी हरकतों पर उतर आया है ,हमारे नेताओं की खामोशी क्या रंग लाती है देखते है । इन्तजार...............
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